Monday, March 9, 2009

परी कथा..

न जाने क्यों, सुबह से एक गाना जेहन में गूँज रहा था, कुछ और सूझा नही तो यहाँ चले आए॥
' न जाने क्या हुआ, जो तूने छु लिया,
खिला गुलाब की तरह मेरा बदन।
निखर निखर गई,सवंर सवंर gayi,
बना के aaina tujhe ओ जानेमन। '

कितना रोमांटिक और खूबसूरत है सोच। बस सोचने और गहराई का सिलसिला है प्यार का अहसास।
सोचना इतना, के आस पास भी भी होश नही रहता, और गहराई इतनी, के कोई झिंझोड़ दे तब कहीं जा कर ख्यालों से वापस ज़मीन पर आते हैं।

राबिया के सामने वाले घर में रहता था शिराज! अपने भाई और 2 दोस्तों के साथ!
पिछले 4 महीनो से एक दूसरे को बस आते जाते हेलो करने की पहचान थी। राबिया रहती थी अपने 4 भाइयों और 3 बहनो के साथ! उस दिन शीराज़ ने अचानक सीढ़ियों पर पूछा तो राबिया ठिठक गयी!
" राबिया तुम मुझे अच्छी लगती हो, अगर मैं तुहे अच्छा लगता हूँ तो अपने घर वालों को तुम्हारे घर भेज दूं?"बिना लाग लपेट के कही बात सुन कर राबिया हैरान रह गयी! कैसे कोई इतनी आसानी से अपने दिल की बात किसी को बोल सकता है जब तक उसमें सच्चाई ना हो!!!"
रात भर सोचती रही और गुनगुनाती रही एफ एम के साथ साथ गाने! दर भी लग रहा था, और सोच नही पा रही थी, क्या कहे और क्या करे? कहीं तो वो भी अच्छा लगता ही था, पर मन का चोर इतनी जल्दी थोड़े ही मानता है!!
उठा कर दीदी को बोल ही दिया उसने! दीदी ने सुना , और सबसे पहले बोली, के किसी भी भाई को नही बताना, नही तो बेचारा पिट जाएगा! " वैसे अच्छा तो मुझे भी लगता है वो, सीधा शरीफ सा है, ऐसा जिसे तुम घरवालों से मिला सको! पर हम पहले समझ कर, सही वक़्त का इंतज़ार करेंगे!"