Friday, October 26, 2012

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शाम गुज़र गयी तेरे इंतजार में,
शब् भी कहीं यूँ ही ना गुज़र जाए !
रुखसत किया उन्होंने कुछ इस तरह हमें,
फिर मिलने की उम्मीद में कहीं ज़िन्दगी न गुज़र जाए!!

Wednesday, January 4, 2012

गीली मिटटी

दफ़नाए जाते रहे सालो, जो सीनो में सितारो के,
मिट्टी उनकी क़ब्रों की गीली है आज तक!
कौन कहता है मौसम का मिज़ाज़ बदला है!!

सालों बीत गये,
बीत गयी रातें,
सर्द कोहरे में दफ़न रातें!
सितारे अब भी उनका पता ढूँढते हैं,
जिनको दफ़न किए, सीनो में जागते हैं रात भर!
कोई होश में लाए सितारों को,
और दे दे खबर!
ना आए यकीं तो, क़ब्रें दिखा देना!
मिट्टी उनकी क़ब्रों की गीली है आज तक!
कौन कहता है बदला है मौसम का मिज़ाज़!!