दफ़नाए जाते रहे सालो, जो सीनो में सितारो के,
मिट्टी उनकी क़ब्रों की गीली है आज तक!
कौन कहता है मौसम का मिज़ाज़ बदला है!!
सालों बीत गये,
बीत गयी रातें,
सर्द कोहरे में दफ़न रातें!
सितारे अब भी उनका पता ढूँढते हैं,
जिनको दफ़न किए, सीनो में जागते हैं रात भर!
कोई होश में लाए सितारों को,
और दे दे खबर!
ना आए यकीं तो, क़ब्रें दिखा देना!
मिट्टी उनकी क़ब्रों की गीली है आज तक!
कौन कहता है बदला है मौसम का मिज़ाज़!!
Wednesday, January 4, 2012
Wednesday, September 7, 2011
Untitled
बेतरतीब सी बिखरी किताबें
ठन्डे फर्श पर बिछी चटाई
कुछ पुराने गीत और कमरे में हलचल
पुरसुकून सब....
कितने करीने का किताबें रखी हैं
चटाई भी कोने में खड़ी है
न कोई गीत न कोई हलचल
कभी चुप्पी में भी सुकून कहाँ आता है!!
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
एक पेड़ ने बेल को सहारा दिया;पर फूलों को खिलने न दिया
पथिकों को दिए फल, पर कोमल पौधों को फलने न दिया
कुछ करीबी रिश्ते भी दूरियों के साथ खिलते हैं !
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कहते हैं चीजें जम जाती हैं बर्फ में
कहते हैं वक़्त भी थम जाता है बर्फ में
हम कभी कुछ पल बर्फ में क्यों नहीं जीते !
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
देर रात तक वो गुफ्तगू करते थे
फिर भी हमसे गुफ्तगू न हुयी
के वो देर तक फ़ोन पर थे !!
ठन्डे फर्श पर बिछी चटाई
कुछ पुराने गीत और कमरे में हलचल
पुरसुकून सब....
कितने करीने का किताबें रखी हैं
चटाई भी कोने में खड़ी है
न कोई गीत न कोई हलचल
कभी चुप्पी में भी सुकून कहाँ आता है!!
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एक पेड़ ने बेल को सहारा दिया;पर फूलों को खिलने न दिया
पथिकों को दिए फल, पर कोमल पौधों को फलने न दिया
कुछ करीबी रिश्ते भी दूरियों के साथ खिलते हैं !
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कहते हैं चीजें जम जाती हैं बर्फ में
कहते हैं वक़्त भी थम जाता है बर्फ में
हम कभी कुछ पल बर्फ में क्यों नहीं जीते !
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देर रात तक वो गुफ्तगू करते थे
फिर भी हमसे गुफ्तगू न हुयी
के वो देर तक फ़ोन पर थे !!
Tuesday, September 6, 2011
Friday, September 2, 2011
Monday, July 5, 2010
Contrast
mutavazzo है मेरी तरफ़ !!
फिर बेरुखी दिखाता क्यों हैं?
रुखसती की बात करके,
मुलाक़ात बदमजा बनाता क्यों है?
mutavazzo - attraction
Thursday, October 29, 2009
Monday, March 9, 2009
परी कथा..
न जाने क्यों, सुबह से एक गाना जेहन में गूँज रहा था, कुछ और सूझा नही तो यहाँ चले आए॥
' न जाने क्या हुआ, जो तूने छु लिया,
खिला गुलाब की तरह मेरा बदन।
निखर निखर गई,सवंर सवंर gayi,
बना के aaina tujhe ओ जानेमन। '
कितना रोमांटिक और खूबसूरत है सोच। बस सोचने और गहराई का सिलसिला है प्यार का अहसास।
सोचना इतना, के आस पास भी भी होश नही रहता, और गहराई इतनी, के कोई झिंझोड़ दे तब कहीं जा कर ख्यालों से वापस ज़मीन पर आते हैं।
राबिया के सामने वाले घर में रहता था शिराज! अपने भाई और 2 दोस्तों के साथ!
पिछले 4 महीनो से एक दूसरे को बस आते जाते हेलो करने की पहचान थी। राबिया रहती थी अपने 4 भाइयों और 3 बहनो के साथ! उस दिन शीराज़ ने अचानक सीढ़ियों पर पूछा तो राबिया ठिठक गयी!
" राबिया तुम मुझे अच्छी लगती हो, अगर मैं तुहे अच्छा लगता हूँ तो अपने घर वालों को तुम्हारे घर भेज दूं?"बिना लाग लपेट के कही बात सुन कर राबिया हैरान रह गयी! कैसे कोई इतनी आसानी से अपने दिल की बात किसी को बोल सकता है जब तक उसमें सच्चाई ना हो!!!"
रात भर सोचती रही और गुनगुनाती रही एफ एम के साथ साथ गाने! दर भी लग रहा था, और सोच नही पा रही थी, क्या कहे और क्या करे? कहीं तो वो भी अच्छा लगता ही था, पर मन का चोर इतनी जल्दी थोड़े ही मानता है!!
उठा कर दीदी को बोल ही दिया उसने! दीदी ने सुना , और सबसे पहले बोली, के किसी भी भाई को नही बताना, नही तो बेचारा पिट जाएगा! " वैसे अच्छा तो मुझे भी लगता है वो, सीधा शरीफ सा है, ऐसा जिसे तुम घरवालों से मिला सको! पर हम पहले समझ कर, सही वक़्त का इंतज़ार करेंगे!"
' न जाने क्या हुआ, जो तूने छु लिया,
खिला गुलाब की तरह मेरा बदन।
निखर निखर गई,सवंर सवंर gayi,
बना के aaina tujhe ओ जानेमन। '
कितना रोमांटिक और खूबसूरत है सोच। बस सोचने और गहराई का सिलसिला है प्यार का अहसास।
सोचना इतना, के आस पास भी भी होश नही रहता, और गहराई इतनी, के कोई झिंझोड़ दे तब कहीं जा कर ख्यालों से वापस ज़मीन पर आते हैं।
राबिया के सामने वाले घर में रहता था शिराज! अपने भाई और 2 दोस्तों के साथ!
पिछले 4 महीनो से एक दूसरे को बस आते जाते हेलो करने की पहचान थी। राबिया रहती थी अपने 4 भाइयों और 3 बहनो के साथ! उस दिन शीराज़ ने अचानक सीढ़ियों पर पूछा तो राबिया ठिठक गयी!
" राबिया तुम मुझे अच्छी लगती हो, अगर मैं तुहे अच्छा लगता हूँ तो अपने घर वालों को तुम्हारे घर भेज दूं?"बिना लाग लपेट के कही बात सुन कर राबिया हैरान रह गयी! कैसे कोई इतनी आसानी से अपने दिल की बात किसी को बोल सकता है जब तक उसमें सच्चाई ना हो!!!"
रात भर सोचती रही और गुनगुनाती रही एफ एम के साथ साथ गाने! दर भी लग रहा था, और सोच नही पा रही थी, क्या कहे और क्या करे? कहीं तो वो भी अच्छा लगता ही था, पर मन का चोर इतनी जल्दी थोड़े ही मानता है!!
उठा कर दीदी को बोल ही दिया उसने! दीदी ने सुना , और सबसे पहले बोली, के किसी भी भाई को नही बताना, नही तो बेचारा पिट जाएगा! " वैसे अच्छा तो मुझे भी लगता है वो, सीधा शरीफ सा है, ऐसा जिसे तुम घरवालों से मिला सको! पर हम पहले समझ कर, सही वक़्त का इंतज़ार करेंगे!"
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