आरंभ .. एक अंश का..
मैं अंश .. हूँ तेरा
तू ना माने .. मैं मानती हूँ
तू ना जाने .. मैं जानती हूँ
एक दिन मिला था तू मुझे!!!
कुछ मिला .. तेरा साथ
कुछ बना .. एक सपना
कुछ टूटा .. एक ख़याल
कुछ छूटा .. एक हिस्सा
कुछ साथ ..बस यादें
कुछ यादें .. एक हँसी
कुछ यादें ..एक दर्द
कुछ पल .. एक जीवन
एक जीवन मैं .. तेरा ही
तू ना माने .. मैं मानती हूँ
तू ना जाने .. मैं जानती हूँ
मैं भी मिलूंगी एक दिन तुझ में
अंत ...
या कहें अनंत
एक अंश तेरा
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सोमवार, 12 फ़रवरी 2007
शनिवार, 10 फ़रवरी 2007
Longing......
शाम के धुंधलके में गुज़रते पल
हर उस पल, गयी धरती जल.
जाड़े की dhundh से ढकी
इंतज़ार में उसका कल..
कब मिलेगी आसमान से!!
दिन एक और गया ढल.
बिरहा की आग में फिर,
एक बार गयी और पिघल
उम्मीद में है शायद,
तभी धड़कटा है उसका दिल.
कभी तो होगा मिलन
कभी तो आएगा वो कल.
कोई तो बताए मूरख को
क्यों हैं इतनी विहवल
ख़ुद आगोश में है उसके
जिसके इंतज़ार में जलती पल पल
ख़ुद में समाए धरती को
हर शाम आसमान गया पिघल.
ना चैन मिले, ना आराम
उस पर ये वक़्त चंचल
ख़ुद में समेटे है vyom सारा
फिर भी किस काम का ये बल
जलती है धरती जब
ख़ुद बरखा में जाता गल
जलती धरती को आराम मिले
बरस गये ये सोच के बादल
दोनो की उम्मीद एक ही
कभी तो जाएगा वक़्त बदल
कोई बताए, कैसा है प्यार ये ,
साथ हैं पर नही पाते मिल
आगोश में हैं एक दूजे के,
फिर भी रहते हैं विकल
कर्तव्य निभाए जाते दोनो
कभी तो मिलेगा इसका फल
जी गये ... जल भी गये
शायद हो जाए प्यार सफल
हर उस पल, गयी धरती जल.
जाड़े की dhundh से ढकी
इंतज़ार में उसका कल..
कब मिलेगी आसमान से!!
दिन एक और गया ढल.
बिरहा की आग में फिर,
एक बार गयी और पिघल
उम्मीद में है शायद,
तभी धड़कटा है उसका दिल.
कभी तो होगा मिलन
कभी तो आएगा वो कल.
कोई तो बताए मूरख को
क्यों हैं इतनी विहवल
ख़ुद आगोश में है उसके
जिसके इंतज़ार में जलती पल पल
ख़ुद में समाए धरती को
हर शाम आसमान गया पिघल.
ना चैन मिले, ना आराम
उस पर ये वक़्त चंचल
ख़ुद में समेटे है vyom सारा
फिर भी किस काम का ये बल
जलती है धरती जब
ख़ुद बरखा में जाता गल
जलती धरती को आराम मिले
बरस गये ये सोच के बादल
दोनो की उम्मीद एक ही
कभी तो जाएगा वक़्त बदल
कोई बताए, कैसा है प्यार ये ,
साथ हैं पर नही पाते मिल
आगोश में हैं एक दूजे के,
फिर भी रहते हैं विकल
कर्तव्य निभाए जाते दोनो
कभी तो मिलेगा इसका फल
जी गये ... जल भी गये
शायद हो जाए प्यार सफल
नीली आँखें.....
जब देखी वो नीली आँखें..
क्या देखूं उनमें..समझ ना पाई
देखू उनमें नीला खुला आसमान
या नीले सागर की गहराई..
उनमें फैले सपने देखूं..
या देखूं गमों की परछाई
नीली रोशनी अंधेरी रातों की!
या बरखा की नीली बदराई
जशन मनाती मौत दिखी
और ज़िदगी लेती अंगड़ाई
ख़ामोशी थी कितनी उनमें,
फिर भी वो कितना बतियाई
दो बूँदे छलकाई जब,
बिन बोले कितनी झल्लाई
समेट कर वो बूँदे बना दी
मेरी कलम की नीली स्याही ..
क्या देखूं उनमें..समझ ना पाई
देखू उनमें नीला खुला आसमान
या नीले सागर की गहराई..
उनमें फैले सपने देखूं..
या देखूं गमों की परछाई
नीली रोशनी अंधेरी रातों की!
या बरखा की नीली बदराई
जशन मनाती मौत दिखी
और ज़िदगी लेती अंगड़ाई
ख़ामोशी थी कितनी उनमें,
फिर भी वो कितना बतियाई
दो बूँदे छलकाई जब,
बिन बोले कितनी झल्लाई
समेट कर वो बूँदे बना दी
मेरी कलम की नीली स्याही ..
मंगलवार, 30 जनवरी 2007
खोने का दर्द
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